इनकम टैक्स, बैंक अकाउंट, UPI pements, में होंगे 1 अप्रैल से बड़े बदलाव जाने ?
नए वित्त वर्ष 2025 की शुरुआत से कई महत्वपूर्ण बदलाव लागू हो रहे हैं, जो लाखों करदाताओं, बैंक ग्राहकों और यूपीआई के माध्यम से भुगतान करने वाले लोगों पर असर डालेंगे। इन बदलावों में आयकर स्लैब, बैंक खातों के नियम, यूपीआई भुगतान की सुरक्षा, जीएसटी के नए नियम और पेंशन योजनाओं में बदलाव शामिल हैं। इन बदलावों के तहत सरकार ने कई सुधारों का ऐलान किया है, जो देशभर के नागरिकों के लिए वित्तीय राहत और सुरक्षा प्रदान करेंगे। इस लेख में हम विस्तार से उन छह प्रमुख बदलावों के बारे में बात करेंगे, जो एक अप्रैल 2025 से लागू हो रहे हैं।
1. नए आयकर स्लैब लागू होंगे
इस साल के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक नई आयकर स्लैब व्यवस्था का ऐलान किया था, जो अब 1 अप्रैल 2025 से लागू हो रही है। यह बदलाव आम नागरिकों और विशेष रूप से नौकरीपेशा लोगों के लिए फायदेमंद साबित होने वाला है। नए आयकर स्लैब के तहत, 12 लाख रुपये तक की सालाना आय वाले लोगों को अब कोई आयकर नहीं देना होगा। इससे न केवल उच्च आय वर्ग को राहत मिलेगी, बल्कि मध्यवर्गीय परिवारों के लिए भी यह एक बड़ा लाभ है। इसके अलावा, नौकरीपेशा लोगों को 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी मिलेगा, जिसका मतलब यह है कि अगर किसी व्यक्ति की कुल आय 12.75 लाख रुपये तक है, तो उस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।
इसका उद्देश्य मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को राहत देना है और देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है। यह कदम सरकार की कोशिश है कि आम आदमी की वित्तीय स्थितियों को सुधारते हुए, टैक्स की दरों को आसान बनाया जाए, जिससे लोग अपनी आय का अधिकतम हिस्सा बचा सकें और खर्चों पर नियंत्रण पा सकें।
2. बैंक खातों में न्यूनतम बैलेंस रखने का नियम
बैंक खातों में न्यूनतम बैलेंस रखने से जुड़े नियमों में भी एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है, जो एक अप्रैल से लागू हो रहा है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), केनरा बैंक जैसे प्रमुख बैंकों ने अपने खाताधारकों से न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने का निर्देश जारी किया है। यदि कोई खाताधारक इस न्यूनतम बैलेंस को बनाए रखने में विफल रहता है, तो उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा। यह जुर्माना हर बैंक के नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है, लेकिन इससे ग्राहकों को अपनी बैंकिंग व्यवस्थाओं में ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ेगी।
इसके अलावा, एक मई से एटीएम से पैसे निकालने की सेवा भी महंगी हो सकती है। रिजर्व बैंक ने बैंकों को एटीएम इंटरचेंज शुल्क बढ़ाने की अनुमति दी है। इसका मतलब यह है कि अब एक महीने में केवल तीन बार ही निःशुल्क एटीएम निकासी की सुविधा मिलेगी। इसके बाद प्रत्येक लेन-देन पर 20 से 25 रुपये का शुल्क लिया जाएगा, विशेष रूप से यदि आप किसी अन्य बैंक के एटीएम का उपयोग करते हैं। यह बदलाव ग्राहकों के लिए थोड़ी सी असुविधा का कारण बन सकता है, लेकिन इससे बैंकों को अपने सिस्टम को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
3. नए जीएसटी नियम लागू होंगे
जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) के तहत कुछ नए बदलाव भी एक अप्रैल से लागू होंगे। सबसे पहले, जीएसटी पोर्टल पर मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) प्रणाली शुरू की जाएगी, जिससे करदाताओं के डेटा की सुरक्षा बढ़ाई जाएगी। इससे किसी भी करदाता के व्यक्तिगत और व्यावसायिक डेटा की चोरी और दुरुपयोग के खतरे को कम किया जा सकेगा।
जीएसटी के नए नियमों के तहत, अब ई-वे बिल केवल उन्हीं दस्तावेजों के लिए तैयार किया जाएगा जो 180 दिनों से अधिक पुराने नहीं होंगे। इस नियम का उद्देश्य व्यवसायों के लिए आपूर्ति श्रृंखला की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सरल बनाना है। साथ ही, जीएसटीआर-7 दाखिल करने के लिए अब टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) रिटर्न को नियमित अंतराल पर भरना होगा। इसके अलावा, प्रमोटरों और निदेशकों को अब जीएसटी सुविधा केंद्र पर जाकर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण करवाना होगा। यह कदम जीएसटी प्रणाली को और अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए उठाया गया है।
4. पेंशन योजना में बदलाव
केंद्र सरकार ने अगस्त 2024 में एकीकृत पेंशन योजना (UPS) शुरू करने की घोषणा की थी, जो एक अप्रैल 2025 से लागू होगी। यह योजना लगभग 23 लाख केंद्र सरकार कर्मचारियों के लिए लाभकारी होगी। इस योजना के तहत, जिन कर्मचारियों ने केंद्र सरकार में कम से कम 25 साल की सेवा पूरी कर ली है, उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद उनके औसत मूल वेतन का 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलेगा। इससे कर्मचारियों को वित्तीय सुरक्षा मिल सकेगी और वे अपनी सेवानिवृत्ति के बाद भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर रह सकेंगे।
इस योजना का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को उनके सेवा के अंत के बाद बेहतर जीवन स्तर और आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इसके जरिए सरकार कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के बाद की वित्तीय स्थिति को सुधारने का प्रयास कर रही है।
5. यूपीआई भुगतान में सुरक्षा बढ़ेगी
यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) भारतीय नागरिकों के लिए एक बेहद लोकप्रिय और सुविधाजनक भुगतान प्रणाली बन चुकी है। यह रोजाना करोड़ों लेन-देन में उपयोग की जाती है। लेकिन, यूपीआई के इस्तेमाल में कई सुरक्षा संबंधी समस्याएं सामने आई हैं, खासकर तब जब लोग अपने मोबाइल नंबर को अपडेट नहीं करते। ऐसे में, यदि आपका मोबाइल नंबर यूपीआई से जुड़ा हुआ है और वह निष्क्रिय है, तो अब आपको इसे जल्द से जल्द अपडेट करना होगा, वरना यूपीआई भुगतान में समस्या आ सकती है।
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने घोषणा की है कि 1 अप्रैल से ऐसे उपयोगकर्ताओं को सूचित किया जाएगा जो लंबे समय से निष्क्रिय नंबर का उपयोग कर रहे हैं। इसके अलावा, दूरसंचार विभाग के दिशानिर्देशों के अनुसार, अगर कोई मोबाइल नंबर 90 दिनों तक निष्क्रिय रहता है, तो उसे नए उपयोगकर्ता को दे दिया जाएगा। इससे सुरक्षा जोखिमों से बचने के लिए इस बदलाव को लागू किया जा रहा है। अगर आपने अपना नंबर अपडेट नहीं किया, तो यूपीआई के जरिए भुगतान की सुविधा बंद हो सकती है।
निष्कर्ष
इन छह बड़े बदलावों के जरिए सरकार ने न केवल वित्तीय सुरक्षा और राहत देने की कोशिश की है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाने का प्रयास किया है। इन बदलावों से करदाताओं, बैंक ग्राहकों, यूपीआई उपयोगकर्ताओं और पेंशनधारियों को अपनी वित्तीय व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी ढंग से संभालने में मदद मिलेगी। इन सुधारों को सही ढंग से अपनाने से देशभर में एक मजबूत और सुरक्षित वित्तीय व्यवस्था स्थापित की जा सकेगी।